Friday, April 23, 2021

Paralysis जैसे एक बीमारी से युद्ध कर एक सफल योद्धा की तरह संघर्ष करके अब हरि नाम से जीवन जी रहे है।

#ISKCONTalkshow #spirituality #HareKrsnaTV #iskconlive #Spirituality #spiritualJourney Hare Krishna!! आज हमारे पास "Ek Mulakat Krishna Bhakt Ke Sath" पर एक विशेष अतिथि है। "एक मुलाकात - कृष्ण भक्त के साथ" शो , आपके लिए दुनिया भर के कुछ सबसे प्रेरणादायक लोगों को लाता है। आज के एपिसोड के लिए, हमारे पास है, Satish Verma (Sat Prema Das) ***** About Satish Verma (Sat Prema Das) ***** Satish Verma (Sat Prema Das) studying in Bhagavat Mahavidyalay Goverdhan, Mathura (U.P.).and teaching the same knowledge through online classes. He did his Bachelor in Arts in Bhopal, M.P. and did Hotel Management also and worked for Five stars hotels in Mumbai. He was inclined to words Spirituality after a series of incidents happens in his personal life. He gives all credits to Krsna for creating negative situations ih his life to drag him to Krsna conscious and the devotees who supported him. Specially to his Vaishnavi Mother. Special feature - Before coming to K.C. he was enjoying his life very much but after joining to K.C. he did hard struggle to practice Krsna-Bhakti with FULL of DETERMINATION .As he was attacked by a unknown severe disease which is similar like paralysis. He was in completely helpless situation and was quarantinetine consecutively for 15 years but he was determined to not to leave Krsna-Bhakti. And now his life is living example of miracle of Holy Name. सतीश वर्मा (सत प्रेमा दास) भागवत महाविद्यालय गोवेर्धन, मथुरा (उ.प्र।) में पढ़ते हैं और ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से दूसरे छात्रों को पढ़ाते हैं। उन्होंने भोपाल,( म.प.) में कला स्नातक, और होटल मैनेजमेंट भी किया और मुंबई के फाइव स्टार होटलों में अनेक वर्षों तक अपनी सेवाएं दी है। उनके निजी जीवन में घटनाओं की श्रृंखलाओ के बाद आध्यात्मिकता के प्रति उनका झुकाव हो गया था ।वे कृष्णभावना में आने का सारा श्रेय कृष्ण को नकारात्मक स्थितियों की श्रृंखला बनाने के लिए और जिन भक्तो ने उनका सहयोग किया उनको देते है । विशेष रूप से उनकी क���ष्ण-भक्त माता जी को। विशेष आकर्षण- कॄष्ण-भक्ति में आने से पहले उनका जीवन का बहुत आनंद से कट रहा था लेकिन कृष्ण-भक्ति में आने के बाद उन्होंने कृष्ण-भक्ति का अभ्यास करने के लिए महान द्रढ़ता के साथ संघर्ष किया। जैसा कि उन्हें एक अज्ञात गंभीर बीमारी ने हमला किया था जो कि लकवा के समान थी । वे एकदम निसहाय अवस्था मे लगातार 15 वर्षों तक क्वारंटाइन (संगरोध) रहे । लेकिन वह कृष्ण-भक्ति नहीं छोड़ने के लिए दृढ़ थे । और अब उनका जीवन भगवान के पवित्र नाम के चमत्कार का उदाहरण है। Watch more videos of "एक मुलाकात - कृष्ण भक्त के साथ" https://www.youtube.com/playlist?list=PLhtmKWc6vRTCz0YsPNXDhXFmDcrW3RJzx
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